सीता स्वयंवर धनुष का नाम

इस लेख में हम आपको बताएँगे सीता स्वयंवर धनुष का नाम क्या था और स्वयंवर के बारे में भी जानकारी देंगे , जानने के लिए इस आर्टिकल को पढ़े

सीता का विवाह पारंपरिक स्वयंवर पद्धति से नहीं हुआ।

महर्षि वाल्मिकी की रामायण में उल्लेख है कि सीता के पिता राजा जनक ने घोषणा की थी कि जो कोई भी शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा और तीर चलाएगा, वह सीता से विवाह करने के लिए पात्र होगा।

राजा जनक की चुनौती:

राजा जनक द्वारा रखी गई शर्त यह थी कि किसी ऐसे व्यक्ति को खोजा जाए जो धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की तकनीक सीख सके और तीर चला सके।
विभिन्न राजाओं के लाख प्रयास के बावजूद कोई भी उस धनुष को हिला तक नहीं सका।

विश्वामित्र का हस्तक्षेप:

रामायण के बालकांड के 67वें सर्ग में ऋषि विश्वामित्र भगवान राम और लक्ष्मण को जनकपुरी ले जाते हैं।
विश्वामित्र का प्रस्ताव है कि राम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करें, जिससे यह जिज्ञासा जगी कि पहले कोई राजा सफल क्यों नहीं हुआ।

दुर्जेय धनुष:

रामायण में वर्णित है कि धनुष को एक विशाल लोहे के बक्से में रखा गया था।
बक्से में आठ बड़े पहिये थे, और इसे ले जाने और खोलने में पाँच हज़ार आदमी लगे।

सीता स्वयंवर धनुष का नाम क्या था

धनुष को पिनाक के नाम से जाना जाता था।

भगवान राम की विजय:

बक्सा खोलने पर, राम न केवल धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, बल्कि कान के पास प्रत्यंचा खींचते समय वह धनुष टूट भी जाता है। इस घटना ने राजा जनक की चुनौती के सफल समापन को चिह्नित किया और राम और सीता का विवाह संपन्न हुआ।

FAQ’s

Q: सीता स्वयंवर में धनुष का क्या नाम था?

Ans: पिनाक था

Q: पिनाक धनुष किसका था?

Ans: शंकर जी

Leave a Comment